भारत देश में आतंकवाद फैलाने वालों को अब किसी तरह से बख्शना नहीं चाहता है। चाहे वो कश्मीर का इलाका हो या फिर मुंबई का। यदि कोई देश की शांति को भंग करने का काम करेगा तो उसको या तो गोली मिलेगी या फिर सजा-ए-मौत दी जाएगी। 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर मासूमों की हत्या कर आतंक का नंगा नाच दिखाया था। इस हमले में पुलिस की टीम ने एक आतंकी को जिंदा पकड़ा था बाकी गोलियों का शिकार हो गए थे। इस आतंकी का नाम अजमल कसाब था। हमले के बाद इस आतंकी पर मुकदमा चला, 4 साल के बाद इस आतंकी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को पुणे के यरवडा जेल में सुबह 7.30 बजे फांसी की सजा दे दी गई थी।
28 अगस्त 2012: मुंबई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। फ़हीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बॉम्बे हाईकोर्ट की रिहाई के फैसले को भी बरकरार रखा है। इन दोंनो पर भारत से मुंबई हमलावरों को मदद करने का आरोप था।
16 अक्तूबर 2012: राष्ट्रपति के सामने दया के लिए भेजी गई कसाब की अर्ज़ी गृहमंत्रालय ने खारिज की और अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी।
5 नवंबर 2012: राष्ट्रपति ने कसाब की दया याचिका खारिज की।
7 नवंबर 2012: केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने फाइल पर दस्तखत किए।
8 नवंबर 2012: कसाब को मौत की सज़ा दिए जाने की फ़ाइल महाराष्ट्र सरकार को भेजी गई। इसी दिन महाराष्ट्र सरकार ने 21 नवंबर को मौत की सजा देने का फ़ैसला किया।
21 नवंबर 2012: कसाब को सुबह 7:30 बजे फांसी दी गई।